सुबह का ज़िक्र
हमने सुबह की और बादशाही अल्लाह ही की है।
नूर-ए-हिदायतنورِ ہدایت
ज़िंदगी के हर लम्हे की ख़ूबसूरत दुआएँ सीखें। उन्हें पढ़ें, उनके मायने समझें और अल्लाह से अपना रिश्ता मज़बूत करें।
दुआ एक इबादत है और हर हालत में अल्लाह की तरफ़ रुजू करने का ज़रिया है।
दुआ अल्लाह को पुकारना है, उससे मदद, रहनुमाई, रहमत और बरकत माँगना।
यह मोमिन को अल्लाह को याद करने और हर हाल में उसकी तरफ़ रुजू करने में मदद देता है।
प्रामाणिक दुआएँ सीखें और धीरे-धीरे उन्हें अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लाएँ।
अपनी हालत के मुताबिक़ दुआ खोजें।
रोज़मर्रा के सबसे छोटे कामों से लेकर सफ़र, इबादत और मुश्किल वक़्त तक — दुआएँ पढ़ें, सुनें, समझें और रोज़ थोड़ी-थोड़ी याद करें।
हमने सुबह की और बादशाही अल्लाह ही की है।
ऐ अल्लाह, तेरे नाम के साथ मैं मरता हूँ और जीता हूँ।
ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फ़रमा।
ऐ मेरे रब, उन पर रहम फ़रमा जैसे उन्होंने बचपन में मुझे पाला।
पाक है वह जिसने इसे हमारे वश में कर दिया।
ऐ मेरे रब, मुझे माफ़ फ़रमा।
तेरे सिवा कोई माबूद नहीं; तू पाक है।
ऐ मेरे रब, मुझे अपनी नेमत का शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे।
जहाँ भी हों, कुछ पल अल्लाह को याद करें।
ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फ़रमा।
क़ुरआन 20:114नूर-ए-हिदायत के साथ इस्लाम को क़दम-ब-क़दम सीखना जारी रखें।
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